Tuesday, 8 October 2024

दशहरे की कहानी

दशहरा आने में केवल 2 दिन बाकी है ,
दो मित्र A और B आपस में चर्चा कर रहे है ,

A : मित्र , दो दिन बाद दशहरा है , क्या प्लानिंग है ?

B : हां मित्र , प्लानिंग तो करनी पड़ेगी , मुझे ये त्योहार बहुत पसंद है ।

A : तो बताओ, कहां बैठेंगे ?

B : बैठेंगे क्यों मित्र ? पहले रावण दहन करेंगे , फिर असत्य पर सत्य की विजय होने की खुशी मनाएंगे , बड़ों का आशीर्वाद लेंगे , छोटों को आशीष देंगे , उन्हे विजयादशमी के विषय में बताएंगे , यह सब करेंगे ना ।

A : जय हो प्रभु ,  महाराज ये सब तो होता रहेगा , मैं शाम की पार्टी की बात कर रहा हूं , ये बताओ पार्टी कहां करेंगे ? दारु कौन लायेगा? सब्जी कौन बनाएगा? ये तय करो ।

B :  कैसी बात कर रहे हो ?? हमारे धर्म के इतने बड़े त्यौहार पर हमे ये सब क्यों करना चाहिए ? ये सब उसी दिन करना जरूरी है क्या ?

A : अरे 9 दिन से खुद पर कंट्रोल कर रखा है , ये नही दिख रहा क्या तुमको ? राम भगवान ने रावण को मारा था उसको हम सेलिब्रेट नही कर सकते क्या ??

B: अगर 10 वें दिन यही सब करना था ,तो तुम्हे ये 9 दिन का ढोंग करना ही नही था , और स्वयं की कुंठित वासनाएं पूर्ण करने को त्योहार मनाने का नाम मत दो , 
राम ने रावण को मारा था , इसका अर्थ ये है कि बुराई पर अच्छाई की जीत हुई , असत्य पर सत्य की जीत हुई , और तुम इसके सेलिब्रेशन में बुराई वाले कार्य करना चाहते हो ??

A : यार तुम तो उपदेश देने लगे , उससे अच्छा है मैं दूसरे मित्रों के साथ पार्टी कर लूं ।

B : तुम्हे जो करना है ,करो , मैं तो वैसे भी अपने परिवार के साथ यह त्यौहार मनाऊंगा , अपनी अगली पीढ़ी को इस त्यौहार के बारे में बताऊंगा , इसे कैसे मनाया जाता है यह शिक्षा दूंगा । पर तुम्हे इतना अवश्य कहूंगा कि तुम्हे सबसे पहले अपने अंदर के रावण को मारने की आवश्यकता है , रावण को भी सब ने समझाया था ,पर उसने अपने मन की ही सुनी , तुम भी यही कर रहे हो ,
ईश्वर तुम्हे सद्बुद्धि दे ।

इसके बाद दोनों ने अपने अपने तरीके से विजयादशमी मनाई ।

शिक्षा : आप और हमें यह तय करना है कि 
1. हमारे धर्म को किस से खतरा है ? अन्य धर्म से , नास्तिकों से या अपने ही धर्म के ऐसे लोगों से जो अपने धर्म को बिना समझे उसका स्वरूप बिगाड़ रहे है ?
2. हमें हमारे समाज में A टाइप के लोगों की आवश्यकता है या B टाइप के लोगों की ? और आप इनमे से किस तरह के है ?
3. यदि हम A टाइप के है तो हम अपने आगे आने वाली पीढ़ियों के समक्ष हमारे धर्म का यह कौन सा स्वरूप रख रहे है ? यदि ये स्वरूप देखने के बाद बच्चे धर्म से विमुख हो रहे है ,तो वो क्या गलत कर रहे है ? हमारे इन कृत्यों के बाद समाज में क्या हमे दूसरों से अच्छे कार्यों की उम्मीद रखनी चाहिए ? क्या प्रभु श्री राम ने आपके ये  सब करने के लिए अपना जीवन मर्यादा को समर्पित किया था ?
4.  हमारा धर्म जो इतनी , वैज्ञानिकता ,तार्किकता और शुद्धता लिए हुए है ,उसका सही स्वरूप दुनिया में क्यों ना दिखे ? हमे थोड़ा ठहर कर अपने धर्म के वास्तविक स्वरूप से परिचित होने और अपनी भावी पीढ़ी को इससे परिचित करवाने की आवश्यकता नहीं है ?
 
यदि आप ने इस आलेख को यहां तक पढ़ा है ,तो कहीं ना कहीं आप इन बातों से सहमत होंगे ,
यदि हां, तो अपने "A" तरह के परिचितों को यह आलेख भेजें और B की तरह बनने हेतु आग्रह करें । 

सभी मित्रों को नवरात्रि पर्व की एवं विजयादशमी की (अग्रिम) शुभकामनाएं । 🚩🚩🚩
प्रेक्षक : आपका "B"प्रकार का मित्र ।

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