हां दौड़ चल रही है , बस एक होड़ चल रही है ,
सबको तेज़ भागना है , पूरी रात जागना है ,
सबसे आगे जो आना है , नम्बर वन जो कहलाना है ,
खाते खाली ना रह जाए , चाहे नींद ना हो पूरी ,
दुनिया को में घूम के देखूं , चाहे खुद से रह जाए दूरी ,
मेरी इतनी ख्वाहिश है कि मुझको चाहिए ये भी वो भी ,
थोड़ा गौर से देखो मुझको, बन गया हूं मै कितना लोभी,
थोड़ा टाइम दे दो पापा , बच्चों की इच्छा यही है ,
बेटा ले लो महंगे तोहफे , पर बस टाइम ही नहीं है ,
एक दिन आयेगा भी ऐसा , जब होगा पैसा ही पैसा ,
पर आईना ये बोलेगा , बन गया तू इंसान कैसा ?
आँखे खोल के तू देख , खुद को कैसा दिख रहा है ,
ये बाज़ार है इमां का , और तू रोज़ बिक रहा है ,
जिस सफर पर चल रहा है , क्या है वो तेरा सफ़र ?
कर के हत्या आज की तू करता है कल की फिकर,
इस तस्वीर को तू देख , देख के सहम जा ,
आँखे एक पल बंद कर ले ,थोड़ा रुक जा , थम जा ,
अब एक गहरी साँस ले कर , कर के शांत अपना मन ,
खुद की छोड़ दे तू चिंता , कर ले सत्य का चिंतन ,
सत्य केवल वो परमेश्वर, जो बैठा तेरे अंदर ही ,
पर तू पा पाएगा उनको , उनकी राह पे चल कर ही ,
अब तो हो जा तू आनंदित , अब तू सत्य से है परिचित,
अब इन मिथ्या मानकों को लेकर होगा ना कभी चिंतित ।
अब ना करना तुझे साबित , के तू है कितना काबिल ,
घोषित कर दे मै नहीं अंधी दौड़ में हूं शामिल ।
घोषित कर दे मै नहीं अंधी दौड़ में हूं शामिल ।