Sunday, 16 August 2026

अंधी दौड़

अंधी दौड़ चल रही है , बस एक होड़ चल रही है 
हां दौड़ चल रही है , बस एक होड़ चल रही है ,

सबको तेज़ भागना है , पूरी रात जागना है ,
सबसे आगे जो आना है , नम्बर वन जो कहलाना है ,

खाते खाली ना रह जाए , चाहे नींद ना हो पूरी ,
दुनिया को में घूम के देखूं , चाहे खुद से रह जाए दूरी ,

मेरी इतनी ख्वाहिश है कि मुझको चाहिए ये भी वो भी , 
थोड़ा गौर से देखो मुझको, बन गया हूं मै कितना लोभी, 

थोड़ा टाइम दे दो पापा , बच्चों की इच्छा यही है ,
बेटा ले लो महंगे तोहफे , पर बस टाइम ही नहीं है ,

एक दिन आयेगा भी ऐसा , जब होगा पैसा ही पैसा ,
पर आईना ये बोलेगा , बन गया तू इंसान कैसा ?

आँखे खोल के तू देख , खुद को कैसा दिख रहा है ,
ये बाज़ार है इमां का , और तू रोज़ बिक रहा है ,

जिस सफर पर चल रहा है , क्या है वो तेरा सफ़र ?
कर के हत्या आज की तू करता है कल की फिकर,

इस तस्वीर को तू देख , देख के सहम जा ,
आँखे एक पल बंद कर ले ,थोड़ा रुक जा , थम जा ,

अब एक गहरी साँस ले कर , कर के शांत अपना मन ,
खुद की छोड़ दे तू चिंता , कर ले सत्य का चिंतन  , 

सत्य केवल वो परमेश्वर, जो बैठा तेरे अंदर ही ,
पर तू पा पाएगा उनको , उनकी राह पे चल कर ही ,

अब तो हो जा तू आनंदित , अब तू सत्य से है परिचित,
अब इन मिथ्या मानकों को लेकर होगा ना कभी चिंतित ।

अब ना करना तुझे साबित , के तू है कितना काबिल ,
घोषित कर दे मै नहीं अंधी दौड़ में हूं शामिल ।
घोषित कर दे मै नहीं अंधी दौड़ में हूं शामिल ।






Tuesday, 3 March 2026

दहन करो इस रावण को

Add*/दस दस लोगों जितनी बुद्धि ,पर दूषित था मन ,
मन के मारे कर ना पाया , नीर –क्षीर चिंतन ।

अहंआकार में समझ ना पाया , मर्यादा का मर्म ,
हरण सिया का कर बैठा वो ,तनिक ना आई शर्म ।

सेना भी थी , ताकत भी थी , ओत प्रोत था ज्ञान से ,
बस ज्ञात नही था उसको कि वह उलझ रहा प्रभु राम से ।

राम ने आखिर किया धराशय टी007 के अभिमान को ,
नमन राम को ,नमन लखन को और वीर हनुमान को ।

\l###/हर वर्ष दशहरा आता, रावण धूं धूं कर के जलता है ,
पर हर युग में वह बन प्रासंगिक, राम के मन को खलता है 

आज समय में खड़ा चौराहे  , पर स्त्री जो ताके है,
गौर से देखो तो रावण,  उसके अंदर से झांकें है ।

धन , दौलत , ताकत , वैभव का जिसको भी अभिमान है ,
बन बैठा वो उस रावण की,  मुंह बोली संतान है ।

जो बात बात पर क्रोधित हो कर, बनते अत्याचारी है ,
सच कह दूं रावण कहलाने,  के सच्चे अधिकारी है ।

क्रोध , कुदृष्टि , अहंकार और दुराचार के वाहन को ,
एक एक कर अपने मन में खोजो, दहन करो इस रावण को ,

एक एक कर अपने मन में खोजो , दहन करो इस रावण को ।🙏
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