Saturday, 2 November 2024

तू भ्रष्ट है....?

जनता/जनप्रतिनिधि का नज़रिया :-

तू भ्रष्ट है , निकृष्ट है , मेरे सृजन हेतु खुद नष्ट है ..
तू भ्रष्ट है , निकृष्ट है , मेरे सृजन हेतु खुद नष्ट है ..

गुणहीन स्वयं को मान लिया,
मेरे गुण गाने में व्यस्त है ,
तुझे खुद के लिये मिले समय नहीं,
पर मेरे लिये उपलब्ध है,
यहाँ आने के पहले था ज्ञान बहुत,
यहाँ बन बैठा अल्पज्ञ है ,
खुद के दम पे पाया तूने ,
पर मेरे प्रति कृतज्ञ है ,
कारण के बिना हुआ अपमानित ,
इस हेतु भी अभ्यस्त है,
कण कण कर खुद को जोड़े रोज़,
फिर हो जाता खुद ध्वस्त है,

तू भ्रष्ट है , निकृष्ट है , मेरे सृजन हेतु खुद नष्ट है ..
तू भ्रष्ट है , निकृष्ट है , मेरे सृजन हेतु खुद नष्ट है .....

अधिकारी/कर्मचारी का मन :- 

उत्कृष्ट हूँ, नहीं भ्रष्ट हूँ, भ्रष्टों के लिये एक कष्ट हूँ..
उत्कृष्ट हूँ, नहीं भ्रष्ट हूँ, भ्रष्टों के लिये एक कष्ट हूँ...

सच सुनने का साहस जिनमे,
मैं उनके प्रति विश्वस्त हूँ,
जिनके चश्मे पर धूल नहीं,
वो देखें मुझे, स्पष्ट हूँ,
कई राह खड़े भौंकें मुझपर,
पथ पर अपने मदमस्त हूँ,
नियत से नियति तय होती,
मैं खुद खुद का प्रारब्ध हूँ,
तू राम कहे तो विस्तृत हूँ,
रावण जो कहे संक्षिप्त हूँ.

मैं धीर हूँ, गंभीर हूँ,  मैं चलूँ अथक,राहगीर हूँ,
है करुणा भी, निश्छलता भी, मिनाक्ष पे लगता तीर हूँ,
रुकता,थमता,ना जड़ होता , सतपथ पर बहता नीर हूँ,
जो जुड़ जाये, उसे छोडूं नहीं, हाँ पाश हूँ,  जंजीर हूँ,
हूँ श्याम भी मैं, मैं श्वेत भी हूँ,  हर रंग भरी तस्वीर हूँ,
हो शांत जगत तो कलम हूँ मैं, रणभूमि तो शमशीर हूँ,


स्पष्ट हूँ, निष्पक्ष हूँ, विश्वस्त हूँ, उपलब्ध हूँ, उन्मुक्त हूँ, मैं व्यस्त हूँ, मदमस्त हूँ..... उत्कृष्ट हूँ...




संस्मरण – "एक सकारात्मक प्रयास"

🚩 *संस्मरण : "एक सकारात्मक प्रयास"* 🚩
वर्ष 2023 के अगस्त माह में तहसील रतलाम ग्रामीण के टप्पा नामली में मेरी दूसरी बार पोस्टिंग हुई ,
जब नामली में पहली बार 6 माह के लिए पदस्थापना हुई थी , तब मुझे उस कार्यालय में 3 प्रमुख कमियां महसूस हुई थी ,
1. कार्यालय में ऐसा कोई कमरा नहीं था , जहां एक साथ 20–25 लोग बैठ पाएं ।अतः यदि मुझे मेरे कार्यालय में मीटिंग लेनी होती तो या तो अपने पटवारियों के साथ बाहर बरामदे में बैठना पड़ता, या नगर परिषद का हॉल उपयोग करना पड़ता ।
2. कार्यालय में एक भी टॉयलेट नहीं था , पुरुष तो नगर परिषद के प्लास्टिक वाले चलित टॉयलेट का उपयोग कर सकते थे ,परंतु महिलाओं के लिए कोई सुविधा नहीं थी ।
3. ऑफिस की सभी फाइल्स अस्त–व्यस्त ऑफिस में ही रखी रहती थी ,उसके लिए रिकॉर्ड रूम की व्यवस्था नहीं थी ।
यूं तो प्रतिवर्ष तहसील में कार्यालय भवन के अनुरक्षण के लिए पचास हजार रुपए का बजट आता था , पर हमारे टप्पे को वो पूरा नहीं मिल सकता था , और मिल भी जाता तो उसमें कुछ नहीं हो सकता था ,
इसके अलावा भोपाल स्तर से मांग करने ओर स्वीकृत होने की प्रक्रिया इतनी लंबी है कि उसके होने तक मेरा निश्चित ही अन्यत्र स्थानांतरण हो जाता ।
ऐसे में मैने अपने पटवारियों और ऑफिस स्टाफ को बुला कर एक विचार उनके समक्ष रखा , कि क्यों ना हम खुद ही अपनी सुविधा के लिए राशि एकत्रित कर के एक हॉल का निर्माण करें ,जिसमें अटैच लेट–बाथ और एक छोटा रिकॉर्ड रूम बना लें , इस विचार का सभी ने एक स्वर में समर्थन किया ।
इस समर्थन के दो प्रमुख कारण थे , पहला तो ये कि वे सभी भी इन समस्याओं से भलीभांति परिचित थे और दूसरा यह कि हर इंसान के अंदर सकारात्मक कार्य करने का जज्बा होता है , बस जीवन की भाग दौड़ और उचित नेतृत्व के अभाव में किसी को इन कार्यों कि याद नहीं आती , और जब आ जाती है ,तब कोई पीछे नहीं हटता ।
खैर सभी ने इस विचार पर हामी भरी , और हम सबने 1000/–रुपए प्रति व्यक्ति प्रति माह इकट्ठा करने का निर्णय लिया , यह न्यूनतम था , कोई चाहे तो क्षमता अनुसार इससे अधिक भी सहयोग कर सकता था ।
कुल मिलाकर प्रतिमाह लगभग 30–40 हज़ार रुपए हम इकट्ठा कर लेते थे ,
सितंबर से दिसंबर तक हम लोग 1 लाख से ऊपर की राशि इकट्ठा कर चुके थे ।
फिर जनवरी 2024 से हमने कार्य का श्रीगणेश किया , बीच में चुनाव कार्य , राजस्व महा–अभियान और कभी धन की कमी के चलते काफी मंद गति से  लगभग 6 माह तक हमारे हॉल निर्माण का कार्य चला। 
इस दौरान जब स्थानीय लोगों को पता चला कि आपसी सहयोग से एक सकारात्मक निर्माण कार्य चल रहा है तब कुछ सहयोगी स्वभाव के लोगों ने अपनी ओर से सहयोग करने की इच्छा जताई , हमारे पास उपलब्ध साधनों की सीमित मात्रा के चलते हम मना भी नहीं कर सके , और फिर आगे तलरह कर हमने इलेक्ट्रिक फिटिंग , फर्नीचर , फ्लोर आदि में बाह्य सहयोग भी लिया ।
अंततः जून 2024 में हमारा हॉल पूरी तरह से तैयार हो गया , 
हमने तय किया कि प्रति मंगलवार को इस हॉल में तहसील का प्रत्येक पटवारी , राजस्व निरीक्षक एवं मै स्वयं बैठूंगा , ओर पब्लिक के लिए दिन भर अपनी समस्याएं बताने के लिए हॉल ओपन रहेगा । और इस तरह हम इस हॉल के निर्माण को सार्थक करेंगे ।
हमने एक बार ऐसा किया भी , जिस पर स्थानीय जनता का बहुत सकारात्मक रिस्पॉन्स मिला । सभी बहुत खुश थे ,
अब हमने तय किया कि इस हॉल का एक औपचारिक उद्घाटन जिलाधीश महोदय के करकमलों से करवा लिया जाए , साथ ही प्रत्येक सहयोगियों को भी आमंत्रित कर धन्यवाद ज्ञापित किया जाए ।
किंतु नियति को कुछ और मंजूर था , यह विचार आने के अगले ही दिन मेरा स्थानांतरण तहसील ताल में प्रभारी तहसीलदार के रूप में हो गया ।
हम औपचारिक उद्घाटन तो नहीं कर पाए परन्तु एक सकारात्मक कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण करने का संतोष मुझे प्राप्त हुआ ।
आज इस पोस्ट के माध्यम से मैं इस कार्य के प्रत्येक सहयोगी का दिल से धन्यवाद करता हूं , ओर मेरे अभिन्न सहयोगी , पटवारी साथियों एवं ऑफिस स्टॉफ को हृदय से बधाई देता हूं ।
इस पूरी घटना से यह पता चलता है कि अगर अच्छी नीयत से कोई कार्य किया जाए तो सबका भरपूर सहयोग मिलता है ,ओर कहीं ना कहीं ईश्वर भी आपका मार्गदर्शन अवश्य करते है ।
वो कहते है ना , 
"कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं होता , एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों" 😊😊😊