एक तरफ तो दोस्ती का, हाथ हम बढ़ा रहे,
वह धीरे-धीरे रेंग कर मेरी ज़मीं पे आ रहा l
वह धीरे-धीरे रेंग कर मेरी ज़मीं पे आ रहा l
एक तरफ तो मैत्री की बस हम चला रहे,
वो दोगला चरित्र अपना, आज भी दिखा रहा l
वो दोगला चरित्र अपना, आज भी दिखा रहा l
वो भूल बैठा, घुस रहा है, शेर की ही मांद में,
गीदड़ों की फौज ले के शेर को डरा रहा ?
गीदड़ों की फौज ले के शेर को डरा रहा ?
तो सुन ले आज के तेरी असलियत दिखाएंगे,
दुम दबा के भागेगा, ऐसा सबक सिखाएंगे l
दुम दबा के भागेगा, ऐसा सबक सिखाएंगे l
विक्रम, मनोज नाम से कांपेगी तेरी पीढ़ियां,
संजय, योगेंद्र जैसे तो ख्वाबों में तेरे आएंगे,
आकर तुझे सताएंगे l
संजय, योगेंद्र जैसे तो ख्वाबों में तेरे आएंगे,
आकर तुझे सताएंगे l
26 जुलाई हर बरस, जलेगा यूं ही ख़ून तेरा,
हम हर बरस गर्व से "विजय दिवस" मनाएंगे,
हम हर बरस इसी तरह "विजय दिवस" मनाएंगे..
जय हिंद !
हम हर बरस गर्व से "विजय दिवस" मनाएंगे,
हम हर बरस इसी तरह "विजय दिवस" मनाएंगे..
जय हिंद !
स्वरचित : "कुलभूषण शर्मा"