Tuesday, 3 March 2026

दहन करो इस रावण को

Add*/दस दस लोगों जितनी बुद्धि ,पर दूषित था मन ,
मन के मारे कर ना पाया , नीर –क्षीर चिंतन ।

अहंआकार में समझ ना पाया , मर्यादा का मर्म ,
हरण सिया का कर बैठा वो ,तनिक ना आई शर्म ।

सेना भी थी , ताकत भी थी , ओत प्रोत था ज्ञान से ,
बस ज्ञात नही था उसको कि वह उलझ रहा प्रभु राम से ।

राम ने आखिर किया धराशय टी007 के अभिमान को ,
नमन राम को ,नमन लखन को और वीर हनुमान को ।

\l###/हर वर्ष दशहरा आता, रावण धूं धूं कर के जलता है ,
पर हर युग में वह बन प्रासंगिक, राम के मन को खलता है 

आज समय में खड़ा चौराहे  , पर स्त्री जो ताके है,
गौर से देखो तो रावण,  उसके अंदर से झांकें है ।

धन , दौलत , ताकत , वैभव का जिसको भी अभिमान है ,
बन बैठा वो उस रावण की,  मुंह बोली संतान है ।

जो बात बात पर क्रोधित हो कर, बनते अत्याचारी है ,
सच कह दूं रावण कहलाने,  के सच्चे अधिकारी है ।

क्रोध , कुदृष्टि , अहंकार और दुराचार के वाहन को ,
एक एक कर अपने मन में खोजो, दहन करो इस रावण को ,

एक एक कर अपने मन में खोजो , दहन करो इस रावण को ।🙏
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