" पिता : पुण्य स्मरण "
माँ की ममता तो दिख जाती है आसानी से ,
पिता की भावनायें बस समझने वाले ही समझ पाते है ,
वो कह के बताते नहीँ , रो के जताते नहीँ ,
बस चुप रह कर सब की ख्वाहिशें पूरी किये जाते है !
अरमान तो उनके भी कई थे जीवन में ,पिता बनने से पहले ,
पर अब वो अपने अरमां पूरे नहीँ करते , बस हमारे प्रति अपना फर्ज निभाते है !
बचपन में अपने बच्चे के हीरो होते है वो ,
पर सच पूछो तो वो बच्चों को खुद से भी बढ़ कर बनाते है !
अपना जीवन बिता देते हे ,हमें सुरक्षित करने के लिये ,
और खुद असुरक्षा में भी अपनी जीवनचर्या चलाते है !
हमें अहसास ही नहीँ होता की वो हमारे लिये कुछ खास कर भी रहे है ,
पर अपने संस्कारों की विरासत हमारे लिये छोड़ जाते है !
जीवनकाल में तो केवल भय ,नियंत्रण और सुरक्षा का पर्याय बने रहते है ,
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